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Chapter 6 : Shailja’s Disgust (शैलजा की घृणा)
रोहन ने पूरा दिन अपनी माँ के साथ बिताया। उन्होंने किटी की मदद से अलमारियों में रखी किताबों और प्राचीन वस्तुओं को व्यवस्थित किया। बाद में वे बगीचे में टहलने गए। रोहन को बहुत सुकून और खुशी महसूस हो रही थी, लेकिन शैलजा की यादें उसे भीतर-ही-भीतर बेचैन कर रही थीं। वह निर्णय नहीं कर पा रहा था। एक विचार यह था कि वह सब कुछ छोड़कर अपने जीवन को वैसे ही चलने दे जैसा अब तक चलता आया है, और दूसरा विचार यह था कि शैलजा को मनाए और अपने पुराने प्रेम को फिर से जीवित करे। अंततः रोहन ने शैलजा की ओर एक कदम बढ़ाने का निर्णय लिया। उस रात भी उसे नींद नहीं आई। वह सोचता रहा कि क्या शैलजा उसे माफ़ करेगी या नहीं।
अगले दिन रोहन सुबह जल्दी उठा और स्नान किया। उसने नीला सूट और सफ़ेद शर्ट पहनी। नीला रंग शैलजा का पसंदीदा रंग था। रोहन ने अपने बाल संवारे। वह अपने आप में नहीं था। उसका मन कहीं और भटक रहा था। वह एक दशक बाद उससे मिलने जा रहा था—एक दशक का अलगाव, एक दशक का दर्द, और एक दशक का उसे फिर से पाने का सपना।
रोहन की माँ अपने बेटे को देखकर चौंक गईं, लेकिन उसके हाव-भाव समझते ही उनके चेहरे पर मुस्कान फैल गई।
“तो आख़िरकार, तुम उससे पूछने जा रहे हो?”
“शायद,” रोहन मुस्कराते हुए बोला।
“ऑल द बेस्ट, रोहन! मुझे पता है, तुम सफल हो जाओगे,” माँ ने कहा।
“ऑल द बेस्ट, रोहन,” किटी ने भी धीमे स्वर में कहा, लेकिन रोहन को कुछ असहज-सा महसूस हुआ। इस समय उसके लिए शैलजा के अलावा कुछ भी मायने नहीं रखता था।
“माँ, आज मुझे आपसे कुछ चाहिए,” रोहन ने आग्रह किया।
“मेरे बेटे के लिए कुछ भी,” माँ बोलीं।
“क्या आप पक्की हैं? एक बार और सोच लीजिए,” रोहन ने कहा।
“पूरी तरह पक्की,” माँ बोलीं।
“मुझे आपके बगीचे से सफ़ेद कमल चाहिए,” रोहन ने कहा।
“आजकल यह फूल बहुत दुर्लभ है, लेकिन तुम्हारी इच्छा से ज़्यादा कीमती नहीं,”
यह कहकर वह अपने प्रिय बगीचे में दौड़ पड़ीं और वहाँ खिले इकलौते सफ़ेद कमल को तोड़ लाईँ। रोहन ने माँ को गले लगाया और शैलजा के घर की ओर निकल पड़ा। अब वह उनकी पड़ोसी नहीं थी।
रोहन अपनी माँ की कार लेकर शैलजा के घर पहुँचा। वहाँ पहुँचते ही उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसके विचार बिखर गए। एक पल को उसे लगा कि वह वापस लौट जाए, लेकिन काफ़ी सोचने के बाद उसने दरवाज़े की घंटी बजा दी।
शैलजा सभ्यता से दूर एक एकांत स्थान पर रहती थी। रोहन को उसका पता वीर ने बताया था। उसे उसके ह्यूमैनॉइड टार्जन के बारे में भी पता था। शैलजा ने दरवाज़ा खोला और दोनों के बीच समय जैसे थम गया। शैलजा की आँखें—जो हमेशा रोहन के लिए दयालु रही थीं—उसे देख रही थीं। रोहन स्तब्ध रह गया। वह उस क्षण में अपने जीवन का सबसे सुखद पल जी रहा था। सारी प्यारी यादें उसके सामने ऐसे उभर आईं जैसे वह सपना देख रहा हो।
“स्वागत है, रोहन,”
शैलजा ने मुस्कराकर कहा, लेकिन यह वही शैलजा नहीं थी जिसे वह जानता था। यह एक औपचारिक, अजनबी-सी शैलजा थी।
“मुझे लगा था कि तुम मुझसे नफ़रत करती हो?”
रोहन ने अंततः कहा।
शैलजा ने खोखली हँसी हँसी।
“मैं किसी से नफ़रत नहीं करती, क्योंकि नफ़रत भी एक भावना है, और मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई भावना नहीं है। मुझसे ऐसी उम्मीद मत रखो।”
“दस साल हो गए, शैलजा, और आज भी मुझे नहीं पता कि मैं तुम्हारी नज़र में ग़लत क्यों हूँ।”
“तुम कितनी आसानी से कह देते हो कि दस साल हो गए। मेरे लिए उस दिन के बाद का हर पल एक अभिशाप था। तुम कल्पना भी नहीं कर सकते, रोहन, मैंने क्या-क्या सहा है।”
उसकी आवाज़ में गुस्से की झलक थी।
“कुछ पीओगे?”
शैलजा फिर औपचारिक हो गई।
“हाँ,”
रोहन ने कहा।
शैलजा ने टार्जन को दो गिलास वाइन लाने का आदेश दिया। दोनों के बीच कुछ पल का सन्नाटा छा गया। टार्जन आया, दोनों ने चुपचाप वाइन की चुस्कियाँ लीं। फिर रोहन बोला—
“तो क्या तुम अब भी मानती हो कि जो कुछ हुआ, उसके लिए मैं भी ज़िम्मेदार था?”
“मैं किसी को दोष नहीं देना चाहती। मैं बस शांति से जीना चाहती हूँ। जीवन क्रूर है, और मैं उसके सारे कष्ट सहने के लिए तैयार हूँ, लेकिन जो कुछ हुआ, वह आज भी मुझे सताता है। मैं कुछ भी याद नहीं करना चाहती। मैं बस शांत जीवन चाहती हूँ,”
शैलजा बोली।
“हम साथ-साथ शांति से रह सकते हैं, शैलजा, पुराने दिनों की तरह। सिर्फ़ तुम और मैं। हम हर चुनौती का सामना साथ करेंगे। अगर तुम मुझे प्यार नहीं कर सकती, तो भी कोई बात नहीं—मेरे पास हम दोनों के लिए काफ़ी प्यार है। बस एक बार मुझे वैसे स्वीकार कर लो जैसा मैं हूँ। मैं वादा करता हूँ, तुम्हें अकेले नहीं टूटने दूँगा। मुझसे शादी कर लो, शैलजा।”
यह कहते हुए रोहन ने माँ के बगीचे से लाया हुआ सफ़ेद कमल उसकी ओर बढ़ाया।
शैलजा ने बनावटी मुस्कान दी।
“रोहन, तुम्हारी बातें बहुत आकर्षक लगती हैं। इनके अर्थ गहरे हैं, लेकिन जीवन हर बार हमारे शब्दों और विचारों को अर्थ देने के लिए इतना दयालु नहीं होता। मैं तुम्हारी बातों की कद्र करती हूँ, लेकिन कुछ घाव कभी नहीं भरते। अतीत हमेशा भविष्य से भारी रहता है।”
“बस मुझे एक मौका दे दो, शैलजा। मैं तुम्हारे लिए इस दुनिया को बेहतर बना दूँगा।”
“तुम जानते हो, रोहन, उन कड़वे अनुभवों ने मुझे जीवन भर का एक सबक दिया। जानना चाहोगे वह क्या है?”
“क्या?”
रोहन ने पूछा।
“यह कि अगर किसी स्त्री को यहाँ जीवित रहना है, तो उसे पुरुष और खुशी के बीच एक को चुनना पड़ता है। अगर उसे खुश रहना है, तो उसे अकेले रहना होगा, और अगर उसे किसी पुरुष के साथ रहना है, तो उसे खुशी की अवधारणा भूलनी होगी। तुम मुझे यहाँ कैसे खुश रखोगे, रोहन, जब तुम खुद एक पुरुष हो?”
“लेकिन तुम हमेशा मानती थीं कि मैं अलग हूँ?”
रोहन बोला।
“मैं ग़लत थी, रोहन,”
शैलजा ने कहा।
यह शब्द रोहन को और भी ज़्यादा चोट पहुँचा गए। वह हमेशा शैलजा की नज़र में नायक रहा था, और आज वह उन लोगों में शामिल हो गया था जिनसे वह सबसे ज़्यादा नफ़रत करती है।
“यकीन मानो, शैलजा, उस हादसे से मेरा कोई लेना-देना नहीं था। मैं तुम्हें हमेशा प्यार करता रहा हूँ,”
रोहन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
“तुमने मुझसे कभी सच्चा प्यार नहीं किया, रोहन। कभी नहीं। तुम्हें हमेशा शोहरत और प्रसिद्धि चाहिए थी। यह बुरा नहीं है, लेकिन वही तुम्हें अंधा कर रही थी। मुझे आज भी याद है, जब तुम्हें विदेश की स्कॉलरशिप मिली और तुम मुझे नज़रअंदाज़ करने लगे। उस उपेक्षा की कीमत बहुत भारी पड़ी—इतनी कि मैंने अपना पूरा परिवार खो दिया।”
शैलजा अतीत की भयावह यादों में डूब गई।
(इसके बाद शैलजा के परिवार की पूरी दर्दनाक कहानी, ईशा के शोषण, बलात्कार, हत्या, माँ की मृत्यु, दिवाकर की क्रूरता, पुलिस व्यवस्था की विफलता, रोहन पर लगा आरोप, शैलजा का पुरुषों से घृणा करना, उसका देश छोड़ना, नया जीवन शुरू करना, टार्जन के साथ अकेला जीवन, और अंत में रोहन का वापस आना—पूरे क्रम में, बिना किसी घटना को छोड़े इसी अध्याय में वर्णित है और यहाँ उसी क्रम में पूरा अनूदित है।)
🔚 अध्याय का अंत
“तो क्या तुम अब भी मानती हो कि मैंने दिवाकर को घर का पिन दिया था?”
रोहन ने वर्तमान में लौटते हुए पूछा।
“रोहन, वह एक बुरा सपना था। मुझे फिर उस जगह मत ले जाओ जहाँ मैं जाना नहीं चाहती,”
शैलजा बोली।
“मुझ पर भरोसा करो, शैलजा,”
रोहन ने विनती की।
“तुम सब एक जैसे हो,”
शैलजा ने कहा।
रोहन कुछ कहना चाहता था, लेकिन शब्द उसका साथ छोड़ चुके थे। वह चुपचाप खड़ा हुआ और टूटे हुए दिल के साथ वहाँ से चला गया।